Thursday, October 22, 2009

रास्तों की मर्जी है


बे जमीन लोंगो को
बे करार आँखों को
बे नसीब कदमो को
जिस तरफ़ भी ले जाए
रास्तों की मर्जी है................!

बे निशान जजीरो पर
बदगुमान रास्तों पर
जिस तरफ़ भी भटका दे
रास्तों की मर्जी है...............!

रोक दे या बढ़ने दे
थम ले या गिरने दे
वासल की लकीरों को
तोंर दे या मिलने दे
रास्तों की मर्जी है..............!

अजनबी कोई लाकर हमसफ़र बना दे
साथ चलने वालो की चाहे रख भी उरा दे
या यादें सारी खाक मे मिला दे
रास्तों की मर्जी है.............!

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