Sunday, November 14, 2010




Aaj DIL phir se udas hai...
najane ye dekh raha kiski aas hai...
yaaden aaj kuch es tarah chubh rahi seene mein...
Ab waqt na jaane zamane ko kahan le jaega...
hum to ruk jaaenge lekin waqt chalta jayega...
kaun chalta hai sada sung karwan e waqt ke...
har musafir thak ke kisi rah pe ruk jayega...
zindagi ek khawab hai tootega jab wo uth jaaenge...
maut ki aagosh mein bus sub bashar so jayega...
kya mohabbat kya khushi kya dosti kya dushmani...
waqt ka sab khel hai aur ye sab khatm ho jayega...
sochta hoon main janaza dekh ker jaate hue...
ek kafan hi hai mera jo saath mere jaayega....!

Monday, November 1, 2010

Mein aur meri तन्हाई....!


Rehtey hain saath saath main or meri तन्हाई

kartey hain DIL ki baaten main or meri तन्हाई....!

Din to guzar jate hain logon ki bheed main

kartey hain basar raat main or meri तन्हाई....!

Aaye na kabhi yaad hum, tumhain bhool kr bhi

jaane kyun kartey hain tumhain yaad main or meri तन्हाई....!

Sanson ka kya bhrosa kab chor jaayen saath

Lagta hai rahenge saath saath main or meri तन्हाई....!

Saturday, October 2, 2010


खुदा हमे ऐसी खुदाई न दे
कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे...

खातावार समझेगी दुनिया तुझे
अब इतनी ज्यादा सफ़ाई न दे...

हंसू आज इतना की इस शोर में
सददा सिस्किओं की, सुनाई न दे...

गुलामी को बरकत समझने लगें
फकीरों को ऐसी रिहाई न दे...

अभी तो बदन में लहू है बहुत
नही चाहिए ऐसी जन्नत मुझे
जहाँ से मदीना दिखायी न दे...

मुझे तू अपनी चादर में यूं ढांप लो,
के ज़मीन-आसमान अब कुछ दिखाई न दे....!!

Thursday, September 30, 2010

कौन हुँ मैं....


इक रोशनी की किरण का मोहताज हुँ मैं...
जान बाकी है लेकिन एक एहसास हुँ मैं...
दिल दफ़्न हो चुका है साँसें जिन्दा हैं...
खुद से ही निराश हो चुकी एक आस हुँ मैं....!

जमाना डरता है जिससे वो दूरी हुँ मैं...
जो पूरी ना हो पायी कभी वो कहानी अधूरी हुँ मैं...
दिल मैं कुछ अरमान थे जो अब टूट गये हैं...
युँ ही बसर हो रही एक मजबूरी हुँ मैं......!

राहत ना दे पाये जो ऐसी छाया हुँ मैं...
खुद की ही गर्मी से जल्ती हुई काया हुँ मैं...
ये ख्याल जब से दिमाग में आये हैं...
सोचता रेहता हुँ बस यही, इन्सान हुँ या माया हुँ मैं....!

Wednesday, September 15, 2010


"Ab Main Aksar Khush Rehta Hoon.........!!
YaaD hey "JANAM"...?????
pechlay Baar tUM nE kAha Tha.....
"MUJh Ko Bhool Ke Tum KhusH rEHna"
"tuM kO tO mAy BHooL nAhi Paya....
"LakiN" ..."JANAM",
chUPkay CHupkAY dUKh Sehta hOon....Aur...
Ab Mai Aksar kHush Rehta HoOn............!!" 

Thursday, September 9, 2010



क्यों कभी गुस्सा करहू किसी पर ....
मै..... तो मस्त मौल्ल हू
गम को पीछे छोड़ कर चला जा रहा हू...
ना जाने कौन मिलेगा ...
ज़िन्दगी की किसी मोर पर....
जो जीना सिखा देगा .....
क्यों कभी गुस्सा करहू किसी पर ....
मै..... तो मस्त मौल्ल हू .......!!!

Monday, June 7, 2010



किसी की आँखों मे मोहब्बत का सितारा होगा
एक
दिन आयेगा की कोई सख्स हमारा होगा.........!

कोई जंहाँ मेरे लिए मोती भरी सीपियाँ चुनता होगा
वो
किसी और दुन्याँ का किनारा होगा.................!

काम मुश्किल है पर जीत ही लूँगा किसी दिल को
मेरे
खुदा का जरा भी अगर सहारा होगा...............!

किसी के होने पे मेरी साँसे चलेगी
कोई
तो होगा जिसके बिना ना मेरा गुजरा होगा........!

देखो
अचानक ये उजाला हो चला
दिल
कहता है क़ि शायद किसी ने धीमे से मेरा नाम पुकारा होगा....!

और
यंहा देखो पानी मे चलता एक अन्जान साया
शायद
कंही किसी दुसरे किनारे पे किसी ने अपना पैर उतरा होगा..........!

कौन रो रहा है रात के सन्नाटे में
शायद
मेरी तरह तन्हाई का कोई मारा होगा..................!

अब
तो बस उसी किसी एक का इंतजार है
अब
किसी और का ख्याल ना दिल को गंवारा होगा.................!

जिन्दगी अब के ना शामिल करना मेरा नाम
अगर
ये दिल वाला खेल दोबारा होगा...................!

Friday, March 26, 2010





मत इंतजार कराओ हमें इतना
की वक़्त के फैसले पर अफ़सोस हो जाये
क्या
पता कल तुम लौट क्र आओ
और
हम खामोश हो जाएँ...............!

दूरयों से दिल को कोई फर्क पड़ता नहीं
बात तो दिलो की नजदिक्यों से होती है
प्यार तो कुछ आपसे था
वरना
बातें जाने कितनो से होती है......!

दिल
से हमें खेलना आता नहीं
इसलिए दिल की बजी हम हार गए
शायद मेरी जिन्दगी से उन्हें बहुत प्यार था
इसलिए वो मुझे जिन्दा ही मार गए............!

लोग
मोहब्बत को खुदा का नाम देते हैं
कोई करता है तो उसे इल्जाम देते हैं
कहते हैं पत्थर दिल रोया नहीं करते
और
पत्थर के रोने को झरने का नाम देते हैं........!

भीगी आँखों से मुस्कुराने का मजा कुछ और है
हस्ते हस्ते पलकें भींग जाने का मजा कुछ और है
बातें कहने पर तो कोई भी समझ लेता है
पर ख़ामोशी कोई समझे तो मजा कुछ और है.........!

Sunday, March 14, 2010


अच्छा तुम्हारे शाहर का दस्तूर हो गया
जिसको दिल से लगाया वो दूर हो गया......!

कागज मे दब के मर गए कीड़े किताब के
दीवाना बे पढ़े मशहूर हो गया........!

महलों मे लगाये हमने कितने सितारे
मगर जमीं से चाँद दूर हो गया.......!

अगर तलाश करूँ तो कोई मिल ही जायेगा
पर तुम्हारी तरह हमें कौन चाहेगा......!

तुम्हे जरुर कोई चाहतों से देखता होगा
मगर वो आँखें हमारी कन्हा से लायेगा.......!

मै अपनी राह मे दीवार बन के बैठा हूँ
अगर कोई आना चाहे तो किस रस्ते से आएगा...!

तुम्हारे साथ ये मौसम फरिश्तों जैसा है
तुम्हारे बाद ये मौसम मुझे बहुत सताएगा........!