Thursday, October 22, 2009

मेरे मालिक


"कदम उठने नही पाते की रास्ता काट देता है
मेरे मालिक मुझे आख़िर तू कब तक आजमाएगा!

अगूर टूटे किसी का दिल तो आस्क भर आँख रोती है
ये दुन्या है गुल्लो की जिसमे कांटे पिरोती है
हम अपने गाओं मे मिलतें हैं दुश्मन से भी इठला कर
तेरा शाहर देखा तो बहुत तकलीफ होती है!

हमें इस चिस्त से उम्मीद क्या थी और क्या निकला
कन्हा जाना हुआ था तय और कन्हा से रास्ता निकला
खुदा जिनको समझते थे वो सीशा थे पत्थर थे
जिसे पत्थर समझते थे वही अपना खुदा निकला!"

1 comment:

  1. these lines are movie lines of movie ye mera india, not written by me. just i have given it an another board.

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