Friday, October 23, 2009

याद


वफ़ा अगर रास न आए वो वफ़ा हम क्यूँ करें
दुआ अगर आसमान तक न जाए वो दुआ हम क्यूँ करें..........!

उस दीवानी का ख्वाब दिन रात देखते हैं हम
नसीब में फ़क़त ख्वाब हैं तो फ़िर मिलने की चाह क्यूँ करें.......!

दिल की हर एक धड़कन उस्सको आवाज देती है पल पल
वो सुनी को उनसुनी कर दे तो हम इज़हार ऐ वफ़ा क्यूँ करें.......!

उसकी याद तर्पएगी यूँही मुझे
बेहतर है भूल जाऊं "दोस्तों" ज़ख्म और गहरा क्यूँ करें..........!

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